में कोई कवि नहीं और शायर तो बिलकुल भी नहीं हूँ। जबसे सोचना शुरू किया तबसे मन में सवाल बहुत उबलते थे लेकिन उनके जवाब नहीं मिल  पाते थे।

बस जीवन में जब से जवाब मिलने शुरू हुए तब से उनको लिखना शुरू कर दिया। समय, स्थान और सीमा का ध्यान नहीं रखा।

वही पेश कर रहा हूँ इस किताब में। अगर पसंद आए तो अपने मिलने वालों से या उनसे जिनसे कभी मिले भी ना हो पर जिनके बारे में सोचते हो तो उन्हें इस किताब की एक प्रति भेठ कर देना। शायद उन्हें जीवन में मेरी तरह बहुत देर तक जवाबों का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा?

बाक़ी आप सभी के प्रेम का अभिलाषी

कुणालजैन

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